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खुद को कैसे निखारें -परिष्कार

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अनेक वर्षो तक जब कोयला घिसा जाता है, तब वह हीरा कहलानो की योग्यता अर्जित कर पाता है।

उसकी कोयले का उपयोग बंद कमरे में अँगीठी जलाने में करने वाले उसकी विषैली वायु का शिकार होते हैं, जबकि परिष्कार की प्रक्रिया से गुजरकर वही प्राणघातक कोयला, प्रतिष्ठा के प्रतीक हीरे में बदल जाता है।

लोहा, राँगा की सामान्य कीमत ज्यादा नहीं होती, पर जब उन्हें तपा दिया जाता है तो वो स्टील से लेकर, औषधि-रसायन व मिंट के सिक्के बनाने के उपयोग में लिए जाते है।

नल से निकलता पानी कपड़े धोने के काम आता है तो वही पानी डिस्टिलेशन की प्रक्रिया से गुजरने के बाद डिस्टिल्ड वाटर बन जाता है और महँगे दामो पर बिकता है।

परिष्कार की प्रक्रिया तुच्छ तत्वों को महान बना देती है।


यही सिद्धांत मनुष्यों पर भी लागू होता है। बिना परिष्कार के मानव जीवन एक विडंबना बनकर रह जाता है।

सामान्य मनुष्य, यों ही अपना जीवन तुच्छ प्रयोज्यों के लिए लगाते दिखाई पड़ते है, पर जब उन्हें परिष्कार, परिशोधन व परिमार्जन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है तो फिर वे ही मनुष्य अपनी गणना ऋषि-मुनियों व अवतारी सत्ताओं के रूप् में कराते दीख पड़ते है।

हर व्यक्ति, अपने जन्म के साथ इसी संभावना को लेकर आता है। उसके जीवन में देवत्व का, ऋषित्व का उदय-परिष्कार से भरी जीवन-साधना से गुजरने पर ही होता है।

हमारे व्यक्तित्व का परिशोधन, हमारे चिंतन का परिमार्जन और हमारी भावनाओं का परिष्कार-ये त्रिवेणी ही मानवीय गौरव-गरिमा का आधार है।

तप साधना के इन सौपानों से गुजरने वाले ही महानता का पर्याय बन जाते है।

How to refine yourself